केन्‍द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केन्‍द्रीय बजट 2021-22 पेश किया, जो इस नये दशक का पहला बजट है और अप्रत्‍याशित कोविड संकट के मद्देनजर एक डिजिटल बजट भी है। आत्‍मनिर्भर भारत का विजन प्रस्‍तुत करते हुए उन्‍होंने कहा कि यह दरअसल 130 करोड़ भारतीयों की एक स्‍पष्‍ट अभिव्‍यक्ति है, जिन्‍हें अपनी क्षमता और कौशल पर पूर्ण भरोसा है। उन्‍होंने कहा कि बजट प्रस्‍तावों से राष्‍ट्र पहले, किसानों की आय दोगुनी करने, मजबूत अवसंरचना, स्‍वस्‍थ भारत, सुशासन, युवाओं के लिए अवसर, सभी के लिए शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, समावेशी विकास, इत्‍यादि का संकल्‍प और मजबूत होगा। वित्त मंत्री ने आयकर रिटर्न को भरने में वरिष्ठ नागरिकों को राहत देते हुए आयकर प्रक्रियाओं के समय-सीमा में कमी, विवाद समाधान समिति के गठन की घोषणा, फेसलैस आईटीएटी, एनआरआई को छूट, लेखा परीक्षा छूट की सीमा में वृद्धि और लाभांश आय के लिए भी राहत प्रदान की है। उन्होंने देश में बुनियादी ढांचे में विदेशी निवेश को आकर्षित करने, सस्ते और किराए के आवासों के लिए राहत, आईएफएससी के लिए कर प्रोत्साहन, छोटे चैरिटेबिल ट्रस्टों को राहत और स्टार्ट-अप्स के लिए प्रोत्साहन जैसे कदमों की भी घोषणाकी।बजट में 75 वर्ष की आयु और उससे अधिक के वरिष्‍ठ नागरिकों को ज्‍यादा राहत प्रदान की गई है। ऐसे वरिष्‍ठ नागरिक जिन्‍हें पेंशन और ब्‍याज सहित आय प्राप्‍त होती है, उन्‍हें आयकर दाखिल करने से राहत प्रदान की गई है। उन्‍हें भुगतान करने वाला बैंक ही उनकी आय से आवश्‍यक कर की कटौती करके राशि अंतरित कर देगा। डिजिटल लेन-देन करने को प्रोत्‍साहन देने और ज्‍यादातर लेन-देन को डिजिटल माध्‍यम से करने वाले व्‍यक्ति पर अनुपालन का भार कम करने के लिए बजट में कर लेखापरीक्षा की सीमा को बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इससे ऐसे व्‍यक्ति लाभान्वित होंगे जो 5 करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक का 95 प्रतिशत लेन-देन डिजिटल माध्‍यम से करते हैं।

Sources: PIB

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